संता एक बार एक शादी में गया था .वहाँ लोगो ने उससे कहा की वो कुछ शायरी कहे
संता बेचारे को कुछ आता जाता नहीं था फिर भी उसने अपना संता दिमाग चलाया और शायरी बक दी -
"शेर कहे, शायरी कहे या गाये कोई गाना
शेर कहे, शायरी कहे या गाये कोई गाना
तेरी नानी पैर उठाये ,और चोदे मेरा नाना "
यह सुन कर पब्लिक संता को भला बुरा कहने लगी ,संता ने फिर शायरी की -
"गर्दिश में सितारे गांड मार लो हमारी
गर्दिश में सितारे गांड मार लो हमारी
जब बहारे चमन में होंगे ,माँ चोद देगे तुम्हारी "
पब्लिक पागल होकर संता पे लात घूंसों की बरसात करने लगी ,उसे पत्थर से मारने लगी
संता -"ए धरती के चाँद सितारों
ए धरती के चाँद सितारों
माँ के लोड़ो पत्थर तो न मारो "
इस मारपिटाई में संता की जान चली जाती है उसे कबर में दफना दिया जाता है इतने में एक औरत को मूत लग जाती है
तो वो संता के कबर पर ही मूत देती है यह देख कर संता का भुत कहता है
"वो आये हमारी कबर पे ,और मूत कर कर चले गए
वो आये हमारी कबर पे ,और मूत कर कर चले गए
मुतने का तो बहाना था ,वो चूत दिखा कर चले गए "
Friday, 11 May 2012
संता की शायरी
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